Sunday, September 4, 2016

हवा चुरा ले गयी


हवा चुरा ले गयी थी मेरी ग़ज़लों की किताब..
देखो,
आसमां पढ़ के रो रहा है.
और
नासमझ ज़माना खुश है कि बारिश हो रही है..!

No comments: