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Tuesday, April 11, 2017

कभी यूँ ही चली आओ



कभी यूँ ही चली आओ,
मचल कर तुम हवाओ सी
कभी फूलों की खुशबू बन,
समा जाओ तन मन में।
कभी तुम रौशनी बनकर,
मुझको पथ दिखा देना।
कभी बारिश की बूंदों सी
बरसो मन के आँगन में।
     राज 21/10/2016

अजीब सिलसिला



अजीब सिलसिला है
तुम्हारी यादो का,
पास रहती हैं,
तो सोने नहीं देती।
दूर रहती हैं,तो
नींद ही नहीं आती
राज 21/10/2016

सांध्य बेला


   सांध्य बेला
 
आ गयी फिर सांध्य बेला,
छिप गया वह तट
जहाँ से पथ मिला था,
है नहीं स्पन्द
जैसे थक गया हूँ।
दीप भी अब जल गये हैं,
मैं खड़ा हूँ फिर अकेला।
तैर जायेगे फिर कई
पलकों में सपने,
सच नहीं होते कभी जो,
टूट कर बिखरेंगे ,
आयेगी जब प्रात बेला।
 
*********डॉ श्रवण कुमार(राज)
26/10/2016

जिंदगी


   जिंदगी
..................................
जिंदगी बहुत खूबसूरत है
इसे खुल कर जियो।
जो पसंद हैं रिश्ते
उनके साथ मिल कर जियो
जो जंचते नहीं हैं मन को
उनसे दूर हो कर जियो।
जिंदगी बहुत खूबसूरत है
इसे मुस्कुरा कर जियो।
जिसके करीब रहने पर
दिल खुशनुमा लगे
उस शख्स के कंधे पर
सर रख कर जियो
जिसके करीब आने से
दिल में शक जगे
उस शख्स से कुछ कदम
दूर जा कर जियो।
जिंदगी बहुत खूबसूरत है
इसे खूबसूरती से जियो।
 
        -राज(03/11/2016)

Wednesday, September 21, 2016

जीवन भर के लिए...

जीवन भर के लिए 
जीवन ठहरा हुआ
सागर नहीं,
गहरा कुँआ या कि
खाई नहीं,
और तालाब भी नहीं,
जो स्थिर रहता है,
सोता है।
जीवन तो झरना है
गिरता है
बहता है,
भर देता है प्राणों को
कण कण में।
जीवन तो नदी है,
नहीं रूकती तब तक
जब तक कि,
अपना सब कुछ
खो देती है।
जीवन तो बादल है,
जो भावों के जल से
कर देता है सराबोर,
संपूर्ण जगत को।
जीवन तो पवन है,
मलयगिरि से चलने वाला,
जो भर देता है मकरंद
फूलों में,
और भर देता है
सुगंध
जीवन भर के लिये
महक जाता है
जनमानस
युगों युगों तक।।

डॉ श्रवण(राज़)
05/09/2016

Wednesday, August 31, 2016

रिश्ता



बदलती उम्र के साथ बदल जाते हैं रिश्ते,
पप्पू पापा बन जाता है
और मुन्नी माँ।
मन्नो मामी बन जाती है और बबिता बुआ।
बढ़ती है उम्र
और साथ साथ जिम्मेदारियां
आदमी समय की चक्की
में पिसकर,
बन जाता है
सिर्फ एक रिश्ता।
 
,,,,,,डॉ श्रवण कुमार(राज)

बनती है दुल्हन


फलक तक जहाँ शाम
बनती है दुल्हन,
जहाँ इस धरा से
छुप के मिलता है सूरज,
वहीँ हाँ वहीँ
बस वहीँ पर मिलूंगा,
तुम्हे ले चलूँगा
सुनहरी किरण में।
 
गगन में जहाँ चाँद
सोता है जी भर,
जहाँ चांदनी उससे
मिलती है प्रियतम,
वहीँ हाँ वहीँ
बस वहीँ पर मिलूँगा,
तुम्हें ले चलूँगा
सितारों में हमदम।
,,,,,(राज)

Thursday, July 28, 2016

सावन में बारिश















सावन में बारिश ☔ की नयी बरसात आयी।

तो कभी पानी तो कभी ओलों की बरात आयी।

आंधेर आसमान में जब -जब तडपी बिजली,

तब तब मेरे कानों में तुमहारी आवाज आयी।।
डॉ.रजनीश गंगवार

Wednesday, July 27, 2016

तुम जिंदगी की किताब


तुम कोई लड़की नहीं हो
तुम मेरी जिंदगी की पवित्र किताब 📚 हो
हम जिंदगी का सब कुछ                               
पढ लेते हैं तुममें
तुमहारी बातों में
तुमहारी हंसी में
तुमहारें जज्बातों में
तुमहारें खयालों में
तुमहारें अंदाजों में
और तुम्हारे रूप के यौवन में
हम देखते हैं
जिंदगी के सारे हुनर
आओ मेरी आँखों में आँखें डाल कर बैठो
हम पढ़ेंगे
तुमहारें यौवन में मदमाती आँखों में
हर शब्द को
हर पन्ने को
हर जवान होती हसरतों को
और फड़फड़ाते जिस्म की महकती गंध को
हम पढेंगे वो सब कुछ
जो तुमको पसंद है
जिसकी तुमको चाहत है
आओ एक पवित्र ग्रंथ की तरह
तुमको कंठस्थ करे.............
डॉ.रजनीश गंगवार