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Wednesday, September 28, 2016

नहाने का वैज्ञानिक तरीका- (must read Scientific knowledge about proper way of taking bath)*

*अपने स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन के लिये इस पोस्ट को अवश्य पढे और पढ़ायें.*

 *क्या आपने कभी अपने आस पास ध्यान से देखा या सुना है कि नहाते समय बुजुर्ग को लकवा लग गया?*
 
*दिमाग की नस फट गई ( ब्रेन हेमरेज), हार्ट अटैक आ गया |*
 
*छोटे बच्चे को नहलाते समय वो बहुत कांपता रहता है, डरता है और माता समझती है की नहाने से डर रहा है,*
 
*लेकिन ऐसा नहीँ है; असल मे ये सब गलत तरीके से नहाने से होता है ।*
 
*दरअसल हमारे शरीर में गुप्त विद्युत् शक्ति रुधिर (खून) के निरंतर प्रवाह के कारण पैदा होते रहती है, जिसकी स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक दिशा ऊपर से आरम्भ होकर नीचे पैरो की तरफ आती है।*
 
*सर में बहुत महीन रक्त् नालिकाये होती है जो दिमाग को रक्त पहुँचाती है।*
 
*यदि कोई व्यक्ति निरंतर सीधे सर में ठंडा पानी डालकर नहाता है तो ये नलिकाएं सिकुड़ने या रक्त के थक्के जमने लग जाते हैं*
 
*और जब शरीर इनको सहन नहीं कर पाता तो ऊपर लिखी घटनाएं वर्षो बीतने के बाद बुजुर्गो के साथ होती है।*
 
*सर पर सीधे पानी डालने से हमारा सर ठंडा होने लगता है, जिससे हृदय को सिर की तरफ ज्यादा तेजी से रक्त भेजना पड़ता है, जिससे या तो बुजुर्ग में हार्ट अटैक या दिमाग की नस फटने की अवस्था हो सकती है।*
 
*ठीक इसी तरह बच्चे का नियंत्रण तंत्र भी तुरंत प्रतिक्रिया देता है जिससे बच्चे के काम्पने से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है , और माँ समझती है की बच्चा डर रहा है ।*
 
*गलत तरीके से नहाने से बच्चे की हृदय की धड़कन अत्यधिक बढ़ जाती है स्वयं परीक्षण करिये।*
.
*तो आईये हम आपको नहाने का सबसे सही तरीका बताते है |*
 
*बाथरूम में आराम से बैठकर या खड़े होकर सबसे पहले पैर के पंजो पर पानी डालिये , रगड़िये, फिर पिंडलियों पर, फिर घुटनो पर, फिर जांघो पर पानी डालिये और हाथों से मालिश करिये|*
 
*फिर हाथो से पानी लेकर पेट को रगड़िये | फिर कंधो पर पानी डालिये, फिर अंजुली में पानी लेकर मुँह पर मलिए | हाथों से पानी लेकर सर पर मलिए।*
 
*इसके बाद आप शावर के नीचे खड़े होकर या बाल्टी सर पर उड़ेलकर नहा सकते है।*
 
*इस प्रक्रिया में केवल 1 मिनट लगता है लेकिन इससे आपके जीवन की रक्षा होती है। और इस 1 मिनट में शरीर की विद्युत प्राकृतिक दिशा में ऊपर से नीचे ही बहती रहती है क्योंकि विद्युत् को आकर्षित करने वाला पानी सबसे पहले पैरो पर डाला गया है।*
 
*बच्चे को इसी तरीके से नहलाने पर वो बिलकुल कांपता डरता नहीं है।*
 
*इस प्रक्रिया में शरीर की गर्मी पेशाब के रास्ते बाहर आ जाती है आप कितनी भी सर्दी में नहाये कभी जुखाम बुखार नहीं होगा*
 
*कृपया इस पोस्ट को आगे भेजें ,यह छोटे बच्चों ,बुज़ुर्गों के लिये बहुत उपयोगी है ।*

Wednesday, July 27, 2016

कब्ज Constipation, Kabj


कब्ज के कई नाम:

बद्धकोष्ठ,कब्जियत ,कब्ज ,कोष्ठबद्धता ,मलावरोध ,कांस्टिपेशन Constipation।

आयुर्वेद के अनुसार कब्ज के कारण
  • आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात दोष (वायु) के बढ़ने से कब्ज होती है
  • आयुर्वेदानुसार वात प्रकृति (शारीरिक गठन दुबला -पतला) वाले व्यक्तियों को कब्ज होने की सम्भावना ज्यादा रहती है ।
  • आयुर्वेदानुसार गरिष्ठ भोजन ,मंदाग्नि [पाचन अग्नि का मन्द होना ],बदहजमी ।
अन्य कारण:
  • भूख न लगने पर भोजन करना, जल्दबाजी में भोजन करना (भोजन को कम चबाना)।
  • कम रेशे युक्त भोजन का सेवन करना ।
  • दिनभर में कम पानी पीना ।
  • बहुत कम शारीरिक मेहनत करना ।
  • आलस्य करना ।
  • मानसिक श्रम ज्यादा शारीरिक श्रम कम करना ।
  • भोजन समय पर न ग्रहण करना ।
  • ज्यादा उपवास करना ।
  • कम भोजन करना ।
  • डायबिटीज के रोगियों में पाचन सम्बंधित समस्या के कारण।
  • नशे के कारण जैसे -धूम्रपान ,शराब पीना ,चाय -कॉफी अत्यधिक पीना ।
कोष्ठबद्धता (कब्ज़ ) किसे कहते हैं :

जब किसी व्यक्ति को मल त्यागने में देरी, कठिनाई हो और मल बहुत कड़ा हो, पाचन तन्त्र की उस अवस्था को कब्ज कहते हैं । कब्ज में मल का निष्कासन सामान्य रूप से नहीं होता है, तथा आंतो में मल रुक जाता है । व्यक्ति का पेट ठीक से साफ नही होता है, और व्यक्ति पूरे दिन तरोताजा महसूस नही कर पाता है । अगर कब्ज का इलाज सही समय पर न किया जाय तो यह लम्बी बीमारी का रूप ले लेती है । मल का सामान्य रूप से निष्कासन न होने पर अन्य समस्याएं होने लगती हैं । जैसे:- गैस, पेट फूलना, पेट में दर्द, एसिडिटी, सिर दर्द, जी मचलाना, मुँह में छाले, भूख न लगना, मुँह से बदबू आना, जीभ में सफ़ेद परत जम जाना इत्यादि ।

कब्ज़ के घरेलू उपचार: ( Home Medicine for Constipation )

  • खाने में फायबर (रेशे )युक्त भोजन जैसे -चोकर के आटे की रोटी ।
  • गेहूँ और चने की आटे की रोटी ।
  • अंकुरित चना (अगर चना न पचे तो भीगे हुए चने को उबालकर खायें )चने में अदरख, धनियां, नीबू, प्याज, नमक इत्यादि स्वादानुसार बनाकर खायें।
  • दूध में मुनक्का उबालकर सोने से पहले उबला हुआ मुनक्का खाकर दूध पियें ।
  • तीन से पॉँच अंजीर सोने से पहले खायें ।
  • हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करे ।
  • रात में दो चम्मच गुलकन्द के साथ गरम दूध लेने से कब्ज में लाभ होता है । मधुमेह रोगी इसका सेवन न करें ।
  • इसबगोल की भूसी दो चम्मच गुनगुने पानी के साथ रात में सोने से पहले लें ।
  • अमरुद और पपीता कब्ज के लिए बहुत फायदेमंद होता है ।
  • प्रतिदिन नियमित रूप से हल्का योग या व्यायाम करे ।
कब्ज की आयुर्वेदिक औषधियाँ: Herbal Remedies For Constipation

हल्के कब्ज होने पर:
  • रात में सोने से पूर्व त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी से एक से दो चम्मच ले ।
  • अरंडी का तेल गुनगुने दूध में एक चम्मच मिलाकर रात में पियें ।
ज्यादा कब्ज के लिए:
  • पंचसकार चूर्ण दो चम्मच गुनगुने पानी से सोते समय लें । 

वैद्य अंजनी कुमार 'कमलेश'
बी० ए० एम० एस० (आयुर्वेदाचार्य )
डी० ए० एम० एस० (आयुर्वेद शास्त्री )
आयुर्वेद रत्न, योगशिरोमणि 
दूरभाष: 98386-79791
 ईमेल: anjanikkamlesh@hotmail.com
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Dr. Anjani Kumar Kamlesh
B.A.M.S. (Ayurvedacharya)
D.A.M.S. (Ayurved Shastri)
Ayurved Ratna, Yogshiromani 
Phone: 98386-79791
email: anjanikkamlesh@hotmail.com