नहीं पकड़ रहा था...ए करेजा. रिसियाना
मत...
मोहब्बत के दुश्मन खाली हमरे तुम्हरे
बाउजी ही नहीं हैं ,
यूनिनार औ एयरसेल वालें
भी हैं..जब फोनवा नहीं मिलता है तो मनवा
करता है कि गढ़ही में कूद कर जान दे दें....
अरे इन
सबको आशिक़ों के दुःख का क्या पता रे?.हम चार किलो चावल बेच के
नाइट फ्री वाला पैक डलवाये थे...लेकिन हाय रे नेटवर्क
कभी कभी तो मन करता है
की चार बीघा खेत बेचकर दुआर पर एक टावर
लगवा लें..आ रात भर तुमसे बतियावें।
तुमको पता है जब जब सरसो का खेत देखता हूँ न तब तब
तुम्हारी बहुते याद आती है..
लगता है तुम हंसते हुए दौड़कर मेरे पास आ रही
हो....मन करता है ये सरसों का फूल तोड़कर तुम्हारे जूड़े में लगा
दूँ..आ जोर से कहूं..."आई लव यू करेजा..
अरे अब गरीब लड़के कहाँ से सौ रुपया का गुलाब
खरीदेंगे?....जानती हो हवा एकदम
फगुनहटा बह रही है... तुम तो घर से
निकलती नहीं हो....यहाँ मटर,चना जौ के
पत्ते सरसरा रहे हैं...रहर और लेतरी आपस में
बतिया रहे हैं.....मन करता है खेत में ही तुम्हारा
दुपट्टा बिछाकर सो जाऊं आ सीधे होली के
बिहान उठूँ....
उस दिन बबीतवा के बियाह में तुम आई
थी न..हम देखे थे..तुम केतना खुश
थी...करिया सूट में एकदम फूल गोभी जैसा
लग रही थी...तुमको पता है तुमको
देखकर हम दू घण्टा नागिन डांस किये थे।
बाकी सब ठीके है...रात दिन
तुम्हारी याद आती है.पागल का हाल हो
गया है.....रहा नहीं जा रहा....तेरह को बनारस में
भरती है.देखो बरम बाबा का आशीर्वाद रहा
तो मलेटरी में भरती होकर तुमसे
जल्दी बियाह करेंगे...
हम नहीं चाहते की तुम्हारा बियाह
किसी बीटेक्स वाले से हो जाए और हमको
तुम्हारे बियाह में रो रोकर पूड़ी पत्तल गिलास चलाना
पड़े....